Cure Without Cut
Gangrene October 15, 2026

असली मरीज़ की कहानी: कैसे Angioplasty ने 68 वर्षीय मरीज़ का पैर Diabetic Gangrene से बचाया

यह मेदांता लखनऊ में देखे जाने वाले मरीज़ों की प्रतिनिधि कहानी है — जो यह दर्शाती है कि limb-salvage angioplasty व्यावहारिक रूप में कैसे काम करती है। मरीज़ की पहचान गोपनीय रखी गई है।

मरीज़ का परिचय

श्री एस.के., 68 वर्षीय सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, लखनऊ निवासी, मेदांता हॉस्पिटल में अपने दाएँ पैर की दूसरी और तीसरी उँगलियों के काले पड़ने की शिकायत लेकर आए। उन्हें 22 वर्षों से Type 2 diabetes था और 30 वर्षों तक धूम्रपान का इतिहास था (5 वर्ष पहले छोड़ दिया था)। पिछले 3 हफ़्तों से उँगलियाँ काली पड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने इसे चोट का निशान समझा। जब उँगलियाँ पूरी तरह काली हो गईं और पैर से बदबू आने लगी, तब उनकी पत्नी ने डॉक्टर के पास जाने पर ज़ोर दिया।

प्रारंभिक जाँच

जाँच में Dr. Rohit Agarwal ने पाया कि पैर की नब्ज़ (foot pulses) अनुपस्थित थी, ABI 0.35 (गंभीर रूप से कम) था, और दूसरी व तीसरी उँगलियों में dry gangrene था जिसकी सीमा रेखा (line of demarcation) metatarsal heads के ठीक नीचे थी। CT Angiography में superficial femoral artery (जाँघ के बीच में) का पूर्ण अवरोध (complete occlusion) और घुटने के नीचे की tibial arteries में गंभीर संकुचन (severe narrowing) पाया गया।

प्रक्रिया (Procedure)

आने के 24 घंटे के भीतर, श्री एस.के. की peripheral angioplasty की गई। Local anaesthesia के तहत, बाएँ पैर की femoral artery (विपरीत पैर) से access लिया गया ताकि blockage तक ऊपर से पहुँचा जा सके। 18 cm लंबी femoral artery occlusion को subintimal angioplasty technique से पार किया गया। पैर को रक्त पहुँचाने वाली tibial arteries को drug-coated balloon से खोला गया। प्रक्रिया के अंत में, completion angiogram में पैर तक मज़बूत रक्त प्रवाह (robust blood flow) दिखा। श्री एस.के. ने बताया कि महीनों बाद पहली बार उनका पैर गर्म लग रहा था।

रिकवरी

श्री एस.के. को अगली सुबह antiplatelet दवाओं के साथ छुट्टी दी गई। अगले 6 हफ़्तों में, gangrene वाली उँगलियाँ स्वाभाविक रूप से अलग हो गईं — बस सामान्य wound care की ज़रूरत पड़ी। किसी भी प्रकार के surgical amputation की ज़रूरत नहीं हुई। 3 महीने बाद, Doppler scan ने पुष्टि की कि धमनियाँ खुली हुई थीं। श्री एस.के. फिर से सुबह की सैर पर जाने लगे — जो उन्होंने एक साल से अधिक समय से नहीं की थी।

सबक़

श्री एस.के. को दो अन्य अस्पतालों ने बताया था कि amputation अनिवार्य है। मेदांता लखनऊ में, vascular assessment और angioplasty ने उनका पैर वापस दिया। यही वास्तविकता है जो interventional radiology gangrene treatment लखनऊ में हासिल कर सकता है — जब मरीज़ समय पर आएँ।

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