बिना ऑपरेशन बच्चेदानी की रसौली का इलाज

Uterine Fibroid Embolization रसौली की रक्त आपूर्ति बंद करके उसे सिकोड़ देता है - बिना सर्जरी बच्चेदानी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

Embolization

गर्भाशय फाइब्रॉइड (रसौली) क्या है?

गर्भाशय फाइब्रॉइड (जिन्हें लियोमायोमा या रसौली भी कहते हैं) गर्भाशय (बच्चेदानी) में या उस पर बनने वाली गैर-कैंसर वाली गाँठें होती हैं। ये माँसपेशियों और रेशेदार ऊतकों से बनी होती हैं और आकार में एक बीज जितनी छोटी से लेकर एक तरबूज़ जितनी बड़ी हो सकती हैं। कुछ महिलाओं में एक ही रसौली होती है, जबकि कुछ में अलग-अलग आकार की कई रसौलियाँ हो सकती हैं।

फाइब्रॉइड बेहद आम हैं। अध्ययनों के अनुसार 50 साल की उम्र तक लगभग 70-80% महिलाओं में फाइब्रॉइड विकसित हो जाते हैं। हालाँकि, सभी फाइब्रॉइड लक्षण नहीं देते। कई महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि उन्हें फाइब्रॉइड है। समस्या तब होती है जब फाइब्रॉइड बड़े हो जाते हैं, संख्या में बढ़ जाते हैं, या आसपास के अंगों पर दबाव डालने लगते हैं।

यह जानना ज़रूरी है कि फाइब्रॉइड लगभग हमेशा सौम्य (गैर-कैंसर) होते हैं। किसी फाइब्रॉइड के कैंसर होने का खतरा 1,000 में 1 से भी कम है। लेकिन इनसे होने वाले लक्षण किसी भी महिला के जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालने वाले लक्षण

गर्भाशय फाइब्रॉइड के लक्षण रसौली के आकार, संख्या और स्थान पर निर्भर करते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं:

कई महिलाएँ सर्जरी से क्यों बचती हैं

जब महिलाओं में लक्षण देने वाले फाइब्रॉइड पाए जाते हैं, तो सबसे आम सर्जिकल सलाह हिस्टेरेक्टमी होती है - यानी बच्चेदानी को पूरी तरह निकालना। भारत में हर साल अनुमानित 6-8 लाख हिस्टेरेक्टमी होती हैं, और फाइब्रॉइड इसका प्रमुख कारण है।

कई महिलाएँ सर्जरी से हिचकिचाती हैं या मना कर देती हैं, और उनके कारण वाजिब हैं:

अच्छी ख़बर यह है कि अब हिस्टेरेक्टमी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। Uterine Fibroid Embolization (UFE) बच्चेदानी को सुरक्षित रखते हुए फाइब्रॉइड का प्रभावी इलाज करता है।

हिस्टेरेक्टमी बनाम UFE: तुलना

पहलू हिस्टेरेक्टमी (सर्जरी) UFE (Cure Without Cut)
एनेस्थीसिया जनरल या स्पाइनल एनेस्थीसिया लोकल एनेस्थीसिया के साथ हल्की बेहोशी (conscious sedation)
चीरा पेट पर बड़ा कट या कई लेप्रोस्कोपिक छेद कलाई या जाँघ में एक छोटा सा पंचर
बच्चेदानी सुरक्षित? नहीं - बच्चेदानी निकाल दी जाती है हाँ - बच्चेदानी पूरी तरह सुरक्षित रहती है
अस्पताल में रुकना 3-5 दिन 1 रात (अक्सर उसी दिन छुट्टी)
ठीक होने का समय 4-8 हफ़्ते 1-2 हफ़्ते
निशान दिखने वाला सर्जिकल निशान कोई निशान नहीं (सिर्फ़ पिनहोल)
सभी रसौलियों का एक साथ इलाज? हाँ (पूरी बच्चेदानी निकालकर) हाँ (सभी रसौलियों का एक साथ इलाज होता है)
खून की हानि काफ़ी (खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है) बहुत कम या नहीं के बराबर
सफलता दर 100% (बच्चेदानी के बिना रसौली दोबारा नहीं हो सकती) 85-90% महिलाओं में लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार

UFE कैसे काम करता है: प्रक्रिया के चरण

Uterine Fibroid Embolization (UFE) एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जो डॉ. रोहित अग्रवाल, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ द्वारा की जाती है। प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  1. प्रक्रिया-पूर्व इमेजिंग - सभी रसौलियों के आकार, संख्या और सटीक स्थान का नक्शा बनाने के लिए MRI या ultrasound किया जाता है।
  2. छोटे से पंचर से एक्सेस - लोकल एनेस्थीसिया में, कलाई (रेडियल आर्टरी) या जाँघ (फ़ीमोरल आर्टरी) में एक छोटी सुई के छेद से एक पतली catheter (ट्यूब) डाली जाती है।
  3. गाइडेड नेविगेशन - रियल-टाइम X-ray गाइडेंस (फ़्लोरोस्कोपी) का उपयोग करते हुए, डॉ. अग्रवाल catheter को रक्त नलिकाओं के ज़रिए गर्भाशय धमनियों (uterine arteries) तक पहुँचाते हैं - यही वे रक्त नलिकाएँ हैं जो रसौलियों को खून की आपूर्ति करती हैं।
  4. Embolization - catheter के ज़रिए गर्भाशय धमनियों में बारीक कण (रेत के दानों से भी छोटे) इंजेक्ट किए जाते हैं। ये कण रसौलियों की रक्त आपूर्ति बंद कर देते हैं, जबकि सामान्य गर्भाशय ऊतक को अन्य स्रोतों से खून मिलता रहता है।
  5. रसौलियाँ सिकुड़ती हैं - रक्त आपूर्ति बंद होने पर रसौलियाँ धीरे-धीरे नरम होती हैं, सिकुड़ती हैं और आने वाले हफ़्तों-महीनों में समाप्त हो जाती हैं। अधिकांश रसौलियाँ 3-6 महीनों में 40-60% तक सिकुड़ जाती हैं।

पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 60-90 मिनट लगते हैं। एक ही सेशन में दोनों तरफ़ (बाएँ और दाएँ गर्भाशय धमनियों) का इलाज किया जाता है, जिससे आकार या संख्या कुछ भी हो, सभी रसौलियों का एक साथ इलाज हो जाता है।

UFE के बाद रिकवरी

UFE के बाद रिकवरी सर्जिकल विकल्पों की तुलना में काफ़ी तेज़ होती है:

अध्ययन लगातार दिखाते हैं कि UFE कराने वाली 85-90% महिलाओं को अपने लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार मिलता है और वे परिणामों से संतुष्ट रहती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या UFE के बाद गर्भधारण हो सकता है?

UFE के बाद कई सफल गर्भधारण हुए हैं। हालाँकि, अगर भविष्य में गर्भधारण आपका प्रमुख लक्ष्य है, तो अपनी परामर्श के दौरान डॉ. अग्रवाल से इस बारे में चर्चा करें। वे यह तय करने में मदद करेंगे कि UFE या कोई अन्य तरीका (जैसे मायोमेक्टमी) आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा है।

क्या UFE के बाद रसौली दोबारा हो सकती है?

एक बार जब embolization से रसौली की रक्त आपूर्ति बंद हो जाती है, तो वह दोबारा नहीं बढ़ती। इलाज की गई रसौलियाँ स्थायी रूप से सिकुड़ जाती हैं। हालाँकि, कम मामलों (10% से कम) में समय के साथ नई रसौलियाँ बन सकती हैं, क्योंकि रसौली बनने की मूल प्रवृत्ति बनी रहती है।

क्या UFE सुरक्षित है?

UFE पिछले 25 से अधिक वर्षों से दुनिया भर में की जा रही है और इसका सुरक्षा रिकॉर्ड उत्कृष्ट है। गंभीर जटिलताएँ दुर्लभ हैं (1-2% से कम)। कई अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा दिशानिर्देशों, जिसमें American College of Obstetricians and Gynecologists (ACOG) भी शामिल है, के अनुसार इसे हिस्टेरेक्टमी से अधिक सुरक्षित माना जाता है।

ज़्यादा डॉक्टर UFE की सलाह क्यों नहीं देते?

UFE इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट द्वारा की जाती है, गायनेकोलॉजिस्ट द्वारा नहीं। कई मरीज़ों को इस विकल्प के बारे में बताया ही नहीं जाता। इसलिए यह ज़रूरी है कि अगर आपको फाइब्रॉइड का पता चला है और आप बच्चेदानी बचाने वाले विकल्प जानना चाहती हैं, तो डॉ. रोहित अग्रवाल जैसे इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

क्या UFE इंश्योरेंस में कवर होता है?

हाँ, UFE भारत की अधिकांश प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा कवर किया जाता है। मेदांता हॉस्पिटल की टीम इंश्योरेंस अनुमोदन प्रक्रिया में आपकी सहायता कर सकती है।

देखें: गर्भाशय फाइब्रॉइड के बारे में और जानें

5 Rules of Uterine Fibroids

When Is Uterus Removal Necessary?

Just One Injection Cures Fibroids - No Surgery

Pregnancy With Fibroids: Risks & Precautions

क्या आप यह इलाज जानना चाहते हैं?

डॉ. रोहित अग्रवाल से परामर्श लें और जानें कि यह इलाज आपके लिए सही है या नहीं।

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