क्या पैरों की बंद नसों का इलाज बिना सर्जरी हो सकता है?
हाँ। Angioplasty एक छोटी सुई के छेद से पैरों की बंद धमनियाँ खोलती है — बिना bypass surgery, बिना बड़ा चीरा। यह अब अधिकतर PAD (Peripheral Arterial Disease) मरीज़ों का पहली पसंद का इलाज है और हज़ारों पैरों को कटने से बचा चुकी है।
PAD (Peripheral Arterial Disease) क्या है?
PAD तब होता है जब atherosclerosis — धमनियों में चर्बी की परत (plaque) जमना — पैरों को खून पहुँचाने वाली धमनियों को संकरा या बंद कर देता है। खून का बहाव कम होने से चलने में पैरों में दर्द (claudication), रात में पैरों में आराम के समय दर्द, न भरने वाले घाव या अल्सर, और गंभीर मामलों में gangrene हो जाता है। PAD ख़ासतौर पर मधुमेह (diabetes) और धूम्रपान करने वालों में आम है। बिना इलाज के, गंभीर PAD से ऊतक मर जाता है और पैर काटना (amputation) पड़ता है — भारत में diabetic limb amputation की दर दुनिया में सबसे अधिक है, और इनमें से कई amputations रोकी जा सकती हैं।
पारंपरिक Bypass Surgery
Bypass surgery बंद धमनी के चारों ओर एक graft — या तो synthetic tube या शरीर के किसी अन्य हिस्से से निकाली गई नस — से चक्कर बनाती है। इसमें general या spinal anaesthesia, जाँघ और पैर में लंबे चीरे, 7-14 दिन अस्पताल में रुकना, और 6-12 हफ़्ते की रिकवरी लगती है। 15-30% मरीज़ों में घाव की जटिलताएँ होती हैं (diabetics में और भी ज़्यादा), और कई बुज़ुर्ग या diabetic मरीज़ इस ऑपरेशन के लिए फिट ही नहीं होते — जिससे उन्हें amputation ही एकमात्र विकल्प बताया जाता है।
Angioplasty कैसे काम करती है
डॉ. रोहित अग्रवाल peripheral angioplasty 2mm की सुई के छेद से करते हैं — आमतौर पर जाँघ की धमनी में, कभी-कभी घुटने के नीचे की रुकावट के लिए पैर की धमनी में। Live X-ray गाइडेंस में बंद हिस्से से एक पतली guidewire सावधानी से पार कराई जाती है। फिर तार के ऊपर से एक छोटा balloon रुकावट की जगह पर ले जाकर फुलाया जाता है, जो plaque को धमनी की दीवार से दबाकर खून का बहाव बहाल करता है। ज़रूरत पड़ने पर धमनी को खुला रखने के लिए metal stent लगाया जाता है। दोबारा सिकुड़ने से रोकने के लिए drug-coated balloons भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। प्रक्रिया local anaesthesia में होती है, और अधिकतर मरीज़ 1-2 दिन में छुट्टी पा जाते हैं।
Angioplasty बनाम Bypass Surgery — तुलना
| पहलू | Bypass Surgery | Angioplasty |
|---|---|---|
| Anaesthesia | General या spinal | केवल local anaesthesia |
| चीरा | लंबा सर्जिकल चीरा | 2mm सुई का छेद |
| Diabetics / बुज़ुर्गों के लिए उपयुक्त? | इन मरीज़ों में उच्च जोखिम | High-risk मरीज़ों में भी सुरक्षित |
| घाव की जटिलताएँ | 15-30% | <2% |
| अस्पताल में रुकना | 7-14 दिन | 1-2 दिन |
| रिकवरी | 6-12 हफ़्ते | 1-2 हफ़्ते |
| दोबारा हो सकती है? | बहुत मुश्किल | हाँ, ज़रूरत पड़ने पर आसानी से |
| Limb salvage rate | तुलनीय | तुलनीय; drug-coated तकनीक से सुधार हो रहा है |
परिणाम — डॉ. रोहित अग्रवाल का अनुभव
मेदांता लखनऊ में डॉ. रोहित अग्रवाल ने 200 से अधिक peripheral angioplasty प्रक्रियाएँ की हैं और 180 से ज़्यादा पैरों को कटने से बचाया है। उनके मरीज़ों में सबसे जटिल मामले शामिल हैं — लंबे total occlusions, multi-level disease, और diabetic foot gangrene वाले मरीज़ जिन्हें अन्य अस्पतालों ने बताया था कि amputation ही एकमात्र विकल्प है। उनके सबसे यादगार मामलों में एक 85 वर्षीय मधुमेह और gangrene के मरीज़ थे जिन्हें above-knee amputation की सलाह दी गई थी — angioplasty के बाद घाव पूरी तरह भर गया और मरीज़ फिर से चलने लगे।
लखनऊ में बिना bypass surgery पैरों की बंद नसों का इलाज (PAD) मेदांता में — डॉ. रोहित अग्रवाल से संपर्क करें: +91 860-445-3663
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