Cure Without Cut
Gangrene May 29, 2026

डायबिटीज़ में पैर की उँगलियाँ काली पड़ना — आपातकालीन चेतावनी और क्या करें

डायबिटीज़ के मरीज़ के पैर की उँगलियाँ काली या गहरे रंग की पड़ना एक वैस्कुलर इमरजेंसी है। हर घंटे की देरी से अधिक ऊतक (tissue) नष्ट होता है। इस लेख में आप जानेंगे कि ऐसे में ठीक क्या करना चाहिए — और क्या बिलकुल नहीं करना चाहिए।

🚨 आपातकाल: अगर डायबिटीज़ के मरीज़ के पैर की उँगलियाँ काली पड़ रही हैं, तो यह इमरजेंसी है। अभी कॉल करें: +91 860-445-3663

पैर की उँगलियाँ काली पड़ने का मतलब क्या है?

जब पैर की उँगलियाँ काली पड़ने लगती हैं, तो इसका मतलब है कि उस हिस्से तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच रहा है। इसे इस्कीमिया (Ischaemia) कहते हैं। डायबिटीज़ में दो मुख्य कारण होते हैं:

रंग बदलने का क्रम इस प्रकार होता है:

  1. पीला/सफ़ेद (Pale): खून की आपूर्ति कम होने लगती है
  2. लाल/धुँधला (Red/Dusky): ऊतक में सूजन और ऑक्सीजन की कमी
  3. गहरा बैंगनी (Dark Purple): ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त
  4. काला (Black): ऊतक मर चुका है — यह गैंग्रीन है

जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना अधिक ऊतक बचाया जा सकता है। एक बार काला पड़ चुका हिस्सा वापस नहीं आता, लेकिन बाकी पैर बचाया जा सकता है।

क्या न करें — ये गलतियाँ बिलकुल न करें

क्या करें — कदम दर कदम

  1. वैस्कुलर स्पेशलिस्ट को कॉल करें: डॉ. रोहित अग्रवाल से तुरंत संपर्क करें — +91 860-445-3663। वे Medanta Hospital, Lucknow में वैस्कुलर और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट हैं।
  2. अगर स्थिति गंभीर है तो ED (Emergency) जाएँ: अगर पूरा पैर काला पड़ रहा है, तेज़ बुखार है, या बदबू आ रही है — तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल के Emergency में जाएँ।
  3. पैर को साफ़ और खुला रखें: पट्टी कसकर न बाँधें। पैर को हवा लगने दें। गंदे कपड़े या तेल न लगाएँ।
  4. मेडिकल रिकॉर्ड साथ लाएँ: शुगर की रिपोर्ट, पहले के कोई भी टेस्ट (Doppler, CT scan), दवाइयों की लिस्ट — ये सब साथ ले जाएँ।

अस्पताल में क्या होता है?

वैस्कुलर स्पेशलिस्ट के पास जाने पर ये जाँचें और प्रक्रियाएँ होती हैं:

  1. ABI Test (Ankle-Brachial Index): यह एक सरल, दर्द-रहित जाँच है जिससे पता चलता है कि पैर में खून की आपूर्ति कितनी कम हुई है।
  2. CT Angiogram: इस स्कैन से पता चलता है कि कौन-सी धमनी कहाँ बंद है। इलाज की पूरी योजना इसी पर आधारित होती है।
  3. उसी दिन Angioplasty संभव: अगर धमनी बंद है, तो एक छोटी सुई से — बिना किसी चीरे के — धमनी खोली जा सकती है। कई मामलों में यह उसी दिन किया जाता है।

Angioplasty के बाद पैर में खून फिर से पहुँचने लगता है और ऊतक को ठीक होने का मौका मिलता है। गैंग्रीन के इलाज और पैर बचाने के बारे में विस्तार से जानने के लिए गैंग्रीन — बिना पैर काटे इलाज पढ़ें।

Ready to Explore This Treatment?

Book a consultation with Dr. Rohit Agarwal to discuss if this approach is right for you.

Not in Lucknow? Online consultation available — book via WhatsApp.

WhatsApp Us