वेरिकोसील: क्या यह आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहा है?
क्या अंडकोष (scrotum) की नसों की एक "छिपी हुई" समस्या संतान सुख में बाधा बन सकती है? पुरुष बांझपन (Male Infertility) के सबसे आम लेकिन सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किए जाने वाले कारणों में से एक है—वेरिकोसील। शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना आपके भविष्य की फैमिली प्लानिंग के लिए एक बड़ी गलती साबित हो सकता है।
मेदांता लखनऊ के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित अग्रवाल बता रहे हैं कि वेरिकोसील और स्पर्म (शुक्राणु) की सेहत के बीच क्या संबंध है, और कैसे आधुनिक विज्ञान बिना किसी पारंपरिक सर्जरी के इसे ठीक कर सकता है।
वेरिकोसील (Varicocele) क्या है?
वेरिकोसील मूल रूप से अंडकोष की "वैरिकोज़ वेन्स" हैं। यह तब होता है जब अंडकोष से खून ले जाने वाली नसों के वाल्व खराब हो जाते हैं, जिससे खून वहां जमा होने लगता है और नसें फूल जाती हैं। इसे छूने पर अक्सर अंडकोष के अंदर "केंचुओं के गुच्छे" (bag of worms) जैसा महसूस होता है।
बांझपन से इसका संबंध
स्वस्थ स्पर्म बनाने के लिए अंडकोष का तापमान शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में थोड़ा कम होना चाहिए। जब वेरिकोसील में खून जमा होता है, तो वहां का तापमान बढ़ जाता है। यह गर्मी स्पर्म बनने की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे:
- स्पर्म काउंट में कमी: शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाना।
- कम मोटिलिटी (Motility): शुक्राणुओं की तैरने की क्षमता कम होना।
- असामान्य आकार (Morphology): शुक्राणुओं का आकार बिगड़ जाना, जिससे वे अंडे को निषेचित (fertilize) नहीं कर पाते।
वह "बड़ी गलती" जो ज़्यादातर पुरुष करते हैं
कई पुरुष दिन भर खड़े रहने या कसरत करने के बाद अंडकोष में हल्का दर्द या भारीपन महसूस करते हैं। चूंकि यह दर्द सहने योग्य होता है, इसलिए वे इसे सालों तक नज़रअंदाज़ करते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। लंबे समय तक तापमान बढ़े रहने से अंडकोष का आकार छोटा (Testicular Atrophy) होने लगता है, जो अंततः लाइलाज हो सकता है।
"पुरुष बांझपन का इलाज अक्सर संभव है अगर इसे समय पर पहचाना जाए। दर्द के 'असहनीय' होने का इंतज़ार करने का मतलब है कि स्पर्म की सेहत को पहले ही काफी नुकसान पहुँच चुका है।" — डॉ. रोहित अग्रवाल
बिना सर्जरी समाधान: परक्यूटेनियस एम्बोलाइजेशन (Embolization)
दशकों तक इसका एकमात्र समाधान "ऑपरेशन" था। लेकिन आज, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी एक बहुत ही आसान विकल्प प्रदान करती है:
- प्रक्रिया: कलाई या जांघ के पास एक छोटे पिनहोल के ज़रिए हम खराब नसों तक पहुँचते हैं और सूक्ष्म कॉइल्स (coils) की मदद से उन्हें सील कर देते हैं।
- कोई सर्जरी नहीं: न कोई चीरा, न कोई टांका और न ही सर्जरी का कोई निशान।
- तेज़ रिकवरी: मरीज को अक्सर उसी दिन छुट्टी मिल जाती है और वे 24–48 घंटों में काम पर वापस लौट सकते हैं।
- सफलता दर: एम्बोलाइजेशन के 3–6 महीने बाद स्पर्म की क्वालिटी में काफी सुधार देखा जाता है।
आपको विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?
- यदि आपको अंडकोष में सूजन या "नसों का गुच्छा" महसूस होता है।
- यदि आपको वहां लगातार भारीपन या हल्का दर्द रहता है।
- यदि आपकी रिपोर्ट में स्पर्म काउंट या मोटिलिटी कम आई है।
पूरी जानकारी और मरीज के अनुभव जानने के लिए डॉ. रोहित अग्रवाल का नीचे दिया गया वीडियो ज़रूर देखें।
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