डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज लखनऊ में — Angioplasty से पैर बचाएँ
डायबिटिक फुट अल्सर जो ठीक नहीं हो रहा — वह ज़ख़्म की देखभाल (wound care) की समस्या नहीं है — यह रक्त प्रवाह (blood supply) की समस्या है। धमनी की रुकावट दूर किए बिना ज़ख़्म की ड्रेसिंग करना वैसा ही है जैसे नाव में छेद बंद किए बिना पानी उलीचते रहना।
डायबिटिक फुट अल्सर क्यों नहीं भरता?
किसी भी ज़ख़्म को भरने के लिए तीन चीज़ें ज़रूरी हैं:
- पर्याप्त रक्त प्रवाह (adequate blood supply) — ऑक्सीजन और पोषक तत्व ज़ख़्म तक पहुँचें
- संक्रमण से मुक्ति (freedom from infection) — बैक्टीरिया हटाना
- दबाव से राहत (offloading pressure) — ज़ख़्म पर भार न पड़े
PAD (Peripheral Artery Disease) पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त को ही रोक देता है। जब पैर तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच रहा, तो चाहे कितनी भी अच्छी ड्रेसिंग करें, कितना भी debridement करें — ज़ख़्म भर ही नहीं सकता।
यही कारण है कि बहुत से मधुमेह रोगी महीनों तक wound care करवाते रहते हैं लेकिन अल्सर ठीक नहीं होता — क्योंकि असली समस्या (धमनी में ब्लॉकेज) का इलाज ही नहीं हुआ।
सही इलाज का क्रम (The Right Treatment Sequence)
- सबसे पहले वैस्कुलर जाँच (Vascular Assessment) — ABI टेस्ट + Doppler अल्ट्रासाउंड से पैर में रक्त प्रवाह की स्थिति जानें
- CT Angiogram — ब्लॉक हुई धमनियों का सटीक नक्शा तैयार करें — कहाँ, कितनी और कैसी रुकावट है
- Angioplasty — बंद धमनी को गुब्बारे (balloon) से खोलें और रक्त प्रवाह बहाल करें — बिना बड़ी सर्जरी के
- Wound Care (ज़ख़्म की देखभाल) — अब ज़ख़्म को वह मिल रहा है जो चाहिए — ऑक्सीजन और पोषण। अब ड्रेसिंग और debridement काम करेगा
- Offloading (दबाव हटाना) — डायबिटिक फुटवेयर या कास्ट (cast) से ज़ख़्म पर वज़न न पड़ने दें
- Infection Control (संक्रमण नियंत्रण) — ज़रूरत अनुसार एंटीबायोटिक्स दें
ध्यान दें: यह क्रम बहुत महत्वपूर्ण है। बिना चरण 1-3 के सीधे चरण 4-6 करना — यही सबसे बड़ी ग़लती है जो अक्सर होती है।
Angioplasty के बाद क्या उम्मीद करें?
जब धमनी खुल जाती है और रक्त प्रवाह बहाल हो जाता है:
- 2–4 सप्ताह में: ज़ख़्म भरने के शुरुआती संकेत दिखने लगते हैं — रंग में सुधार, दर्द में कमी, नया ऊतक (granulation tissue) बनना शुरू
- 6–12 सप्ताह में: अधिकांश अल्सर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं
- नियमित फ़ॉलो-अप: Wound Clinic में नियमित समीक्षा — ज़ख़्म की प्रगति की निगरानी और ड्रेसिंग बदलना
सफलता की कुंजी है — पहले रक्त प्रवाह बहाल करो, फिर ज़ख़्म का इलाज करो।
मदद कब लें?
कोई भी डायबिटिक ज़ख़्म जो 2 सप्ताह में ठीक नहीं हो रहा — उसे तुरंत वैस्कुलर असेसमेंट की ज़रूरत है।
देर करने से स्थिति बिगड़ती है — ज़ख़्म गहरा होता है, संक्रमण फैलता है, और अंत में पैर काटने (amputation) की नौबत आ सकती है। समय पर angioplasty से यह सब रोका जा सकता है।
डॉ. रोहित अग्रवाल मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ में डायबिटिक फुट की वैस्कुलर जाँच और angioplasty उपलब्ध कराते हैं। विस्तार से जानें: पैर की नस में ब्लॉकेज — बिना सर्जरी के इलाज
पैर का ज़ख़्म ठीक नहीं हो रहा? तुरंत कॉल करें: +91 860-445-3663 | मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ
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