क्या ब्रेन स्ट्रोक का इलाज बिना सर्जरी हो सकता है?
हाँ। Mechanical thrombectomy जाँघ की धमनी से कैथेटर डालकर दिमाग़ की नस से खून का थक्का निकालती है — बिना ओपन ब्रेन सर्जरी के। यह बड़ी नसों के स्ट्रोक का सबसे प्रभावी इलाज है और स्ट्रोक शुरू होने के घंटों बाद भी लकवा ठीक कर सकती है।
स्ट्रोक में क्या होता है?
स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग़ को खून पहुँचाने वाली कोई धमनी खून के थक्के (clot) से बंद हो जाती है। उस धमनी से खून पाने वाला दिमाग़ का हिस्सा ऑक्सीजन और glucose से वंचित हो जाता है। दिमाग़ की कोशिकाएँ मिनटों में मरने लगती हैं। जितनी देर तक रुकावट बनी रहती है, उतना ज़्यादा दिमाग़ का ऊतक स्थायी रूप से नष्ट होता है — जिससे लकवा, बोलने में असमर्थता, दृष्टि की समस्या, या मृत्यु हो सकती है। स्ट्रोक के दौरान हर मिनट लगभग 20 लाख दिमाग़ की कोशिकाएँ मरती हैं।
Golden Hour — "Time Is Brain"
स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट मायने रखता है। "Time is brain" का मतलब है: जितनी जल्दी खून का बहाव बहाल हो, उतना ज़्यादा दिमाग़ का ऊतक बचाया जा सकता है। थक्का घोलने वाली दवाई (IV thrombolysis) लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के अंदर दी जा सकती है, लेकिन यह बड़ी नसों के स्ट्रोक में सिर्फ़ 30-40% मामलों में ही थक्का घोल पाती है। बड़े थक्कों के लिए mechanical thrombectomy कहीं ज़्यादा प्रभावी है — और imaging में बचाने योग्य ऊतक दिखने पर चुनिंदा मरीज़ों में यह 24 घंटे तक की जा सकती है।
Mechanical Thrombectomy कैसे काम करती है
डॉ. रोहित अग्रवाल thrombectomy जाँघ की धमनी में एक छोटे से छेद के ज़रिए करते हैं। Live X-ray गाइडेंस में कैथेटर रक्त वाहिकाओं से होते हुए दिमाग़ की बंद धमनी तक पहुँचाया जाता है। थक्के की जगह पर stent-retriever device या aspiration catheter लगाया जाता है। थक्के को पकड़कर धमनी से बाहर खींच लिया जाता है या सक्शन से निकाल लिया जाता है — जिससे दिमाग़ के भूखे ऊतक में तुरंत खून का बहाव बहाल होता है। प्रक्रिया आमतौर पर 30-60 मिनट में पूरी होती है, और कई मामलों में मरीज़ को प्रक्रिया टेबल पर ही neurological सुधार दिखने लगता है।
परिणाम — डॉ. रोहित अग्रवाल का अनुभव
मेदांता लखनऊ — उत्तर प्रदेश का पहला comprehensive stroke unit — में डॉ. रोहित अग्रवाल ने 150 से अधिक mechanical thrombectomy प्रक्रियाएँ की हैं, जिनमें 90% recanalization (थक्का हटाने की) दर रही है। उनके मरीज़ों की उम्र 17 साल के किशोर से लेकर 98 साल के बुज़ुर्ग तक रही है, जो दर्शाता है कि यह प्रक्रिया सभी उम्र में सुरक्षित रूप से की जा सकती है। मेदांता लखनऊ UP में Penumbra Flash 16 aspiration system — नवीनतम पीढ़ी की clot-removal तकनीक — इस्तेमाल करने वाला पहला केंद्र भी था, जो तेज़ और अधिक पूर्ण थक्का निकासी संभव बनाती है।
लखनऊ में ब्रेन स्ट्रोक इमरजेंसी इलाज मेदांता में — डॉ. रोहित अग्रवाल से संपर्क करें: +91 860-445-3663
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